धान खरीदी Dhan Kharidi Token 2025–26: किसानों को टोकन जारी, धान बेचने की विशेष व्यवस्था – पूरी जानकारी

Dhan Kharidi Token 2025–26 छत्तीसगढ़ में खरीफ विपणन वर्ष 2025–26 की धान खरीदी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। किसानों की सुविधा और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए राज्य सरकार ने इस बार भी टोकन आधारित प्रणाली लागू की है, जिसके तहत किसान अपनी भूमि धारिता के अनुसार टोकन प्राप्त कर धान बेच सकेंगे। “टोकन तुहर हाथ” मोबाइल ऐप और उपार्जन केंद्रों के माध्यम से जारी किए जा रहे ये टोकन किसानों को भीड़भाड़ से बचाते हैं और खरीदी को तेज तथा व्यवस्थित बनाते हैं। धान खरीदी की पूरी प्रक्रिया, तिथियां, आवश्यक दस्तावेज, नियम, शिकायत केंद्र और प्रशासन की सलाह — सब कुछ इस पोस्ट में विस्तार से जानें।

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धान खरीदी Dhan Kharidi Token 2025–26: किसानों को टोकन जारी, धान बेचने की विशेष व्यवस्था – पूरी जानकारी


छत्तीसगढ़ सरकार ने खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के लिए धान उपार्जन प्रक्रिया को सुचारू और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से धान खरीदी की तिथि 15 नवंबर 2025 से 31 जनवरी 2026 तक निर्धारित की है। इस बार लगभग 50 कार्य दिवसों में पूरे प्रदेश में धान खरीदी पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है।

धान खरीदी 2025–26: किसानों के लिए टोकन जारी, राज्य सरकार की विशेष व्यवस्था

किसानों की सुविधा के लिए इस वर्ष भी टोकन व्यवस्था को जारी रखा गया है, जिससे भीड़ कम हो और खरीदी पूरी तरह व्यवस्थित रूप से हो सके।

किसानों को टोकन कैसे जारी होंगे?

राज्य शासन के निर्देशों के अनुसार किसानों को उनकी भूमि धारिता के आधार पर टोकन दिए जा रहे हैं:

भूमि (एकड़ में)मिलने वाले टोकन की संख्या
2 एकड़ तक1 टोकन
2 से 10 एकड़अधिकतम 2 टोकन
10 एकड़ से अधिकअधिकतम 3 टोकन

टोकन प्राप्त करने के दो तरीके हैं:

1. उपार्जन केंद्र से सीधे टोकन लेना

किसान अपने पंजीकृत धान उपार्जन केंद्र से सीधे टोकन प्राप्त कर सकते हैं।

2. टोकन तुहर हाथ मोबाइल ऐप से स्वयं टोकन डाउनलोड करना

  • ऐप Google Play Store पर उपलब्ध है
  • किसान अपने मोबाइल से लॉगिन कर टोकन स्वयं प्राप्त कर सकते हैं
  • यह प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल और आसान है

👉 यह डिजिटल सिस्टम किसानों को केंद्रों पर अनावश्यक भीड़ और लंबी कतारों से बचाता है।

धान खरीदी से संबंधित शिकायत या सुझाव कहां करें?

किसान किसी भी समस्या या शिकायत के लिए संपर्क कर सकते हैं:

खाद्य विभाग टोल-फ्री नंबर: 1800-233-3663

इसके साथ सभी जिलों में:

  • अपर कलेक्टर की अध्यक्षता में इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर
  • कॉल सेंटर
  • धान रीसाइक्लिंग रोकने के लिए विशेष निगरानी टीम
  • कोचियों/बिचौलियों पर कड़ी निगरानी
  • धान उठाव और परिवहन की निरंतर मॉनिटरिंग

यह सभी तंत्र किसानों को पारदर्शी एवं सुरक्षित खरीदी उपलब्ध कराने के लिए सक्रिय हैं।

धान उपार्जन केंद्र पर जाते समय क्या-क्या साथ ले जाना है?

प्रशासन ने किसानों को सलाह दी है कि धान लेकर जाते समय इन नियमों का पालन अवश्य करें:

धान अच्छी तरह सुखाकर ले जाएं

  • नमी 17% से अधिक नहीं होनी चाहिए

धान साफ और अशुद्धियों से मुक्त हो

आवश्यक दस्तावेज साथ रखें

  • टोकन
  • ऋण पुस्तिका
  • आधार कार्ड

निर्धारित समय पर ही धान बेचने केंद्र पहुँचें

यह सभी नियम पालन करने से खरीदी बिल्कुल सुचारू और समय पर पूरी होगी।

किसानों से प्रशासन की अपील

जिला प्रशासन ने किसानों से कहा है कि:

  • धान को पूरी तरह सुखाकर लाएं
  • टोकन पर दिए गए समय का पालन करें
  • धान में नमी व गंदगी न रखें
  • नियमों का पालन कर सहयोग दें

ताकि प्रदेश में धान खरीदी प्रक्रिया पारदर्शी, सरल और तेज़ी से संचालित हो सके।

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धान खरीदी 2025–26 से जुड़े महत्वपूर्ण फायदे

  • ✔️ किसानों को बिना भीड़ के धान बेचने की सुविधा
  • ✔️ डिजिटल टोकन से गलतफहमी में कमी
  • ✔️ बिचौलियों की पकड़ कम होगी
  • ✔️ रियल-टाइम मॉनिटरिंग से पारदर्शिता बढ़ेगी
  • ✔️ धान उठाव और भुगतान प्रक्रिया तेज होगी

FAQs – धान खरीदी 2025–26 से जुड़े सामान्य सवाल

Q1. धान खरीदी कब से कब तक होगी?

15 नवंबर 2025 से 31 जनवरी 2026 तक धान खरीदी की जाएगी।

Q2. टोकन कैसे प्राप्त करें?

आप उपार्जन केंद्र से सीधे टोकन ले सकते हैं या टोकन तुहर हाथ ऐप से ऑनलाइन डाउनलोड कर सकते हैं।

Q3. कितने एकड़ पर कितने टोकन मिलेंगे?

  • 2 एकड़ तक – 1 टोकन
  • 2–10 एकड़ – 2 टोकन
  • 10 एकड़ से अधिक – 3 टोकन

Q4. धान में कितनी नमी स्वीकार्य है?

17% से अधिक नमी स्वीकार नहीं होगी।

Q5. शिकायत कहां करें?

खाद्य विभाग टोल-फ्री नंबर: 1800-233-3663

Disclaimer

यह लेख विभिन्न सरकारी प्रेस नोट्स और उपलब्ध सूचनाओं के आधार पर सामान्य जानकारी प्रदान करता है। किसी भी प्रकार के बदलाव, नई गाइडलाइन या अपडेट के लिए कृपया छत्तीसगढ़ खाद्य विभाग या जिला प्रशासन की आधिकारिक सूचनाओं को ही अंतिम मानें।

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